मेरे लफ्जों से शब्दों तक, कुछ बातें चली आती है, कुछ तेरे बारे में बताती है, कुछ मेरे बारे में कह जाती हैं । मेरे लफ्जो से शब्दों तक कुछ बातें चली आती हैं । हसीन लम्हों की दास्तां, तो कभी उन्से हुए राब्ता, यह भूले ना बुलाती है। मेरे लफ्जो से शब्दों तक कुछ बातें चली आती हैं । कुछ रूठने की यादें, तो कुछ यादों में वादे, यह लुत्फ-ए-हयात दे जाती है। मेरे लफ्जो से शब्दों तक कुछ बातें चली आती हैं । अब उन लम्हों को रोता हूं, ना जागु, ना सोता हूं, क्यों दास्तां यह बन जाती है। मेरे लफ्जो से शब्दों तक कुछ बातें चली आती हैं । सागर दिल छोड़ ना तू, यह यादें यूं तोड़ ना तू, यही तो मोहोबत कहलाती है। मेरे लफ्जो से शब्दों तक कुछ बातें चली आती हैं । By: सागर लक्ष्य (Advocate) Click On Name To Go My Facebook Account.