Skip to main content

ਸਾਂਝਾਂ ਇਸ਼ਕ ਦਿਅਾ - Punjabi Poetry



ਸਾਂਝਾਂ ਇਸ਼ਕ ਦਿਅਾ ਪਿਅਾਰ ਵਾਲੀਅਾਂ ਨੇ,
ਹਰ ਇਕ ਦਿਨ ਮੈਂ ਰਿਝਾਂ ਪਾਲੀਅਾਂ ਨੇ..
ਹਾਲ ਕੀ ਮੇਰਾ ਜਾਣੇਗੀ ਤੂੰ ,
ਦਰਦਾ ਦੇ ਵਿਚ ਮੈਂ ਜੋ ਸਂਭਾਲੀਅਾਂ ਨੇ ..


ਸਾਂਝਾਂਸਾਂਝਾਂ ਨਾਲ ਪਾਅ ਲਈਆਂ ਨੇ,
ਸੁਪਨੇਆ ਵਿਚ ਰਾਤਾਂ ਲੰਗਾਹ ਲਈਅਾਂ ਨੇ..
ਸਾਥ ਕੀ ਮੇਰਾ ਜਾਣੇਗੀ ਤੂੰ,
ਹਰ ਇਕ ਦਿਨ ਦੂਰੀਆ ਬਣਾਅ ਲਈਆਂ ਨੇ..


'ਸਾਗਰ' ਸਾਂਝਾਂ ਨਦੀ ਸਮੁੰਦਰ ਦੀਅਾਂ ਨੇ,
ਪੈੰਢੇ ਵਖ਼ਰੇ ਪਰ ਮਿਲਣਗਿਅਾਂ ਨੇ..
ਸਾਂਝਾਂ ਵਿਚ ਪਈ ਨਾ ਤੂੰ,
ਰਬ ਨੇ ਤਕਦੀਰਾਂ ਬਨਾ ਲਈਅਾਂ ਨੇ..


ਸਾਗਰ ਲਕਸ਼ਯ (ਵਕੀਲ)
(Adv. Sagar Lakshyaa)

Comments

Popular posts from this blog

"व्यवस्था परिवर्तन"

  क्या हम सच में " व्यवस्था परिवर्तन " चाहते हैं?         यह सच है कि भारत एक संघीय राष्ट्र है। इस राष्ट्र में बहुत सारी विभिन्नताएं हैं, जो इसे दूसरे देशों से भिन्न करती है। इसी विभिन्नता भरे भारत में बहुत सारे आंदोलन जहां देश को (भारतीय गोरों के द्वारा विदेशी गोरों अर्थात अंग्रेजों से) आजा़द करवाने के लिए हुए वहीं भारतीय  गोरों की गुलामी से आजादी दिलवाने के लिए भी हुए।        इस बात से अब सब परिचित ही हैं कि भारत में अछूतों की गुलामी की तस्वीर अफ्रीका के लोगों की गुलामी से भी भयानक थी। इसी भयानक और जिल्लत भरी गुलामी से छुटकारा पाने के लिए हर वर्ग के महान लोगों ने कड़ी मेहनत की। अगर हम इन महान लोगों को शुरुआत से पहचानने की कोशिश करें तो बहुत सारी शख्सियतों का जिक्र आएगा, जिन्होंने अपना जीवन भारतीय अछुतों की दशा और दिशा को सुधारने में लगा दिया। लेकिन, इसका नतीजा हुआ क्या? अछुतों को एक अलग धर्म मिला। जिसमें हलाकि हिंदू धर्म जैसी छुआ छात तो नहीं थी लेकिन यह इसके प्रभाव से वंचित भी नहीं था। नतीज़तन, धर्म तो बदल हो गया लेकिन जाति-...